Thursday, 29 August 2013

most important news jivan sandesh

एक िदन एलाइज जब ऑिफस पहंचे तो उह गेट पर एक बड़ा सा नोिटस लगा िदखा :” इस कंपनी म जो यि आपको आगे बढ़ने से रोक रहा था कल उसक मृयु हो गयी . हम आपको उसे आखरी बार देखने का मौका दे रहे ह , कृपया बारी-बारी से मीिटंग हॉल म जाएं और उसे देखने का क कर .”

जो भी नोिटस पढता उसे पहले तो दुःख होता लेिकन िफर जासा हो जाती क आखर वो कौन था जसने उसक ोथ रोक रखी थी … और वो हॉल क तरफ चल देता …देखते देखते हॉल के बाहर काफ भीड़ इका हो गयी , गास ने सभी को रोक रखा था और उह एक -एक कर के अदर जाने दे रहा था.

सबने देखा क अदर जाने वाला यि काफ गंभीर हो कर बाहर िनकलता , मानो उसके िकसी करीबी क मृयु हई हो !… इस बार अदर जाने क बारी एक पुराने एलोयी क थी …उसे सब जानते थे ,सबको पता था िक उसे हर एक चीज से िशकायत रहती है …. कंपनी से , सहकिमय से , वेतन से हर एक चीज से !

पर आज वो थोडा खुश लग रहा था …उसे लगा िक चलो जसक वजह से उसक लाइफ म इतनी ोलस थ वो गुजर गया …अपनी बारी आते ही वो तेजी से ताबूत के पास पहंचा और बड़ी जासा से उचक कर अदर झाँकने लगा …पर ये या अदर तो एक बड़ा सा आइना रखा हआ था.

यह देख वहधत हो उठा और जोर से िचाने के हआ िक तभी उसे आईने के बगलएक सदेश लखा िदखा -

इस दुिनया म केवल एक ही यि है जो आपक ोथ रोक सकता है और वो आप खुद ह . इस पूरे संसार म आप वो अकेले यि ह जो आपक िज़दगी म ांित ला सकता है .

आपक िज़दगी तब नह बदलती जब आपका बॉस बदलता है , जब आपके दोत बदलते ह , जब आपके पाटनर बदलते ह , या जब आपक कंपनी बदलती है …. िज़दगी तब बदलती है जब आप बदलते ह , जब आप अपनी लिमिटंग िबलीस तोड़ते ह , जब आप इस बात को रीयलाईज करते ह िक अपनी िज़ंदगी के लए सफ और सफ आप जमेदार ह . सबसे अछा रता जो आप बना सकते ह वो खुद से बनाया रता है . खुद को देखये , समझये …किठनाइय से घबराइए नह उह पीछे छोिडये … िवजेता बिनए , खुद का िवकस करए और अपनी उस वातिवकता का िनमाण करए जसका करना

दुिनया एक आईने क तरह है : वो इंसान को उसके शश िवचार का ितिबब दान करती है . ताबूत म पड़ा आइना दरअसल आपको ये बताता है क जहाँ आप अपने िवचार क शि से अपनी दुिनया बदल सकते ह वहां आप जीिवत होकर भी एक मृत के समान जी रहे ह।

इसी वत दफना दीजये उस पुराने ’म’ को और एक नए ’म’ का सृजन कजये !!!”

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Wednesday, 28 August 2013

rajput kabita

Har Roj kuch naya karne wale Mushkilo se kabhi Darte Nahi, Aasma ko chune ka Honsala rakhte h hum Lekin kabhi Sirjami ko Chodte nahi., Raste hum kathin Chunte h lekin Manzil Pane se pehle kabi Rukte nahi, Chahe kitne bhi Aage aa jate h hum phir b Piche rahne walo ko bhulte nahi., Hamari Pehchan Hamare Sanskar h or Hum In Sanskaro ko bhulte nahi, to kyu rah gaye h hum aaj itna piche? Kyuki Shayad hum aaj apno ka sath chahte nahi., Mat Bhulo k hum kshatriya h jo apno ko kabi bhulate nahi, Hum wo h jisne raaj kiya h is duniya per apne Prem se Phir aaj kyu hum sab Prem se rahte nahi.? Yahi sawal ye Dhanu puchti h aap sbse kya hum phir se vese ban skte nahi